शनिवार को क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए
शनिवार की प्रकृति दारुण है। यह भगवान भैरव और शनि का दिन है। समस्त दुःखों एवं परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए शनिवार के दिन उपवास रखना चाहिए। शनि हमारे जीवन में अच्छे कर्म का पुरस्कार और बुरे कर्म के दंड देने वाले हैं। कहते हैं कि जिसका शनि अच्छा होता है वह राजपद या राजसुख पाता है। तो आओ जानते हैं कि शनिवार के दिन कौनसे कार्य नहीं करना चाहिए।
शनिवार के दिन क्या ना करें
शनिवार को मांस मदिरा और किसी भी तरह की नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए,शराब पीना सबसे घातक माना गया है। इससे आपके अच्छे-भले जीवन में तूफान आ सकता है।
पूर्व, उत्तर और ईशान दिशा में यात्रा करना मना है। खासकर पूर्व दिशा में दिशाशूल रहता है तो जरूरी हो तो अदरक खाकर ही यात्रा करें। इससे पहले पांच कदम उल्टे पैर चलें।
लड़की को शनिवार के दिन ससुराल नहीं भेजना चाहिए।
शनिवार के दिन तेल, लकड़ी, कोयला, नमक, लोहा या लोहे की वस्तु क्रय करके नहीं लानी चाहिए वर्ना बिना बात की बाधा उत्पन्न होगी और अचानक कष्ट झेलना पड़ेगा।
इस दिन बाल कटना या नाखून काटना भी वर्जित माना जाता है।
इस दिन नमक, तेल, चमड़ा, काला तिल, काले जुते, लोहे का सामान नहीं खरीदना चाहिए। नमक खरीदने से कर्ज बढ़ता है। कलम, कागज और झाड़ू खरीदने से भी बचना चाहिए।
इस दिन भूलकर भी किसी कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए अन्यथा आपको बहुत कष्टों का सामना करना पड़ता है।
शनिवार के दिन खाने में तेल का त्याग करें।
शनिवार के दिन क्या करें
इस दिन शनिदेव के नाम का जाप करें ।
शनिवार के दिन शाम को पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए और तिल या सरसों तेल का दीपक जलाना चाहिए।
शनिदेव को नीले रंग के पुष्प अतिप्रिय हैं और इस दिन उनकी पूजा करते समय नीले पुष्प चढ़ाएं ।
इस दिन भगवान भैरव की उपासना भी करनी चाहिए।
शनिवार के दिन छाया दान करें। इसके लिए कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें और उसमें सिक्का डालें। उसमें अपनी परछाई देखें और तेल को दान कर दें।
काले तिल, कंबल, उड़द की दाल का दान करना चाहिए. इससे शनि की साढ़े साती का प्रभाव भी कम होता है
शनिवार को विभूति, भस्म या लाल चंदन धारण करें।
शनिवार को नैऋत्य, पश्चिम और दक्षिण दिशा में यात्रा करना सही रहता है।
मंत्र
शनि महामंत्र
ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
शनि दोष निवारण मंत्र
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम।
उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।।
शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
शनि का वैदिक मंत्र
ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
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