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शिक्षक (अध्यापक) के लिए मनोविज्ञान की उपयोगिता :Utility Of Psychology For Teacher

मनोविज्ञान शिक्षको को बच्चो विद्यार्थियों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने का कार्य करता है यह शिक्षको के लिए बहुत ही उपयोगी है । मनोविज्ञान ही है जिसने शिक्षा को वैज्ञानिक बनाया है एडवर्ड थार्नडाइक को शिक्षा मनोविज्ञान का जनक कहा जाता है आज के समय में शिक्षा मनोविज्ञान आइए जानते है शिक्षक (अध्यापक) के लिए  मनोविज्ञान की उपयोगिता क्या है (Utility of psychology for teacher) इस पोस्ट विस्तार से-


शिक्षक (अध्यापक) के लिए शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता Utility Of Psychology For Teacher

 

शिक्षक के लिए मनोविज्ञान की क्या उपयोगिता है ?   इसका प्रयोग किस प्रकार कर सकता है?   इससे किस प्रकार सहायता मिल सकती है? हम इन और इन जैसे और संबंधित अन्य प्रश्नों पर निम्नलिखित पंक्तियों में अपने विचारों को व्यक्त कर रहे हैं- 

utilityofpsychologyforteacher


 

1.स्वयं का ज्ञान व तैयारी (अध्यापक द्वारा स्वयं को  तैयार करना):-


कोई व्यक्ति किसी कार्य को करने में तभी सफल होता है, जब उसमे उस कार्य को करने की योग्यता होती है। शिक्षा मनोविज्ञान की सहायता से अध्यापक अपने  निहित  स्वभाव ,बुद्धि , स्तर, व्यवहार योग्यता आदि का ज्ञान प्राप्त करता है या ज्ञान से शिक्षण कार्य में सफल बनने में सहायता देता है और इस प्रकार उसके व्यवसाय की तैयारी में अत्यधिक योग देता है। इसकी मदद से अध्यापक खुद तैयार करता है और जनता है अध्यापक का क्या दायित्व है ? उसे किस प्रकार कार्य करना है ? शिक्षक की क्या जरूरत है ? आदि बाते अध्यापक (शिक्षक) शिक्षा मनोविज्ञान की सहायता से जान सकते है

स्किनर का मत है – “ शिक्षा मनोविज्ञान अध्यापकों की तैयारी की आधारशिला है”।


2.विद्यार्थियों (बालको) के विकास का ज्ञान Knowledge Of Child Development :-

 

मनोविज्ञान के अध्ययन से शिक्षक को बाल विकास की विभिन्न अवस्थाओं का ज्ञान हो जाता है । वह इन अवस्था में बालकों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक आदि विशेषताओं से परिचित हो जाता है । वह इन विशेषताओं को ध्यान में रखकर विभिन्न अवस्थाओं के बालकों के लिए पाठ्य – विषयों और क्रियाओं का चुनाव करने में सफलता प्राप्त करता है ।

 

3. विद्यार्थियों (बालको) स्वभाव व व्यवहार का ज्ञान (Knowledge Of Child’s Nature And Behaviour) :-
 

शिक्षा मनोविज्ञान अध्यापक को बालको के स्वभाव और व्यवहार से परिचित कराता है। इन दोनों बातों के आधार की मूल प्रवृत्तियां और संवेग  होते हैं । अध्यापक विभिन्न अवस्थाओं के बालकों की मूल प्रवृत्तियों और संवेगो से परिचित होने के कारण उनका अधिकतम शिक्षण और निर्देशन करने में सफल होता है । रायबन (Rayburn) का मत है – “हमें बाल स्वभाव और व्यवहार का जितना अधिक ज्ञान होता है उतना ही अधिक प्रभावपूर्ण बालक से हमारा संबंध होता है । मनोविज्ञान हमें यह ज्ञान प्राप्त करने में सहायता दे सकता है"।


4.बालकों के चरित्र निर्माण में सहायक Character Development Of The Child


शिक्षा मनोविज्ञान बालकों के चरित्र निर्माण में सहायता देता है । यह शिक्षक को उन विधियों को बताता है, जिनका प्रयोग करके वह बालकों में नैतिक गुणों का विकास कर सकता है और उन्हें एक योग्य विद्यार्थी बनाता है।


5. बालकों का ज्ञान  Knowledge Of Child :-


शिक्षक अपने कर्तव्यों का कुशलता से पालन तभी कर सकता है, जब उसे अपने छात्रों का पूर्ण ज्ञान हो। वह भले ही अपने विषयों और अपने शिक्षण में  अद्वितीय  योग्यता रखता हो, पर यदि उसे अपने छात्रों का ज्ञान नहीं है, तो उसे पग-पग  पर निराशा को अपनी सहचरी बनाना पड़ता है। किसी विषय और उसके शिक्षण में योग्यता होना एक बात है। पर उनको छात्रों की रुचि और क्षमताओं के अनुकूल बनाना दूसरी बात है, अतः डग्लस और हॉलैंड का मत है- “ शिक्षा – मनोविज्ञान का संबंध छात्रों के अध्ययन से है, अतः यह उन व्यक्तियों के ज्ञान का महत्वपूर्ण अंग होता है, जो शिक्षण – कार्य करना चाहते हैं”


6.बालकों की आवश्यकता का ज्ञान Knowledge Of The Needs Of Children


विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बालकों की कुछ आवश्यकताएं होती हैं , जैसे – प्रेम , आत्मसम्मान , स्वतंत्रता और किए जाने वाले कार्यों की स्वीकृति की आवश्यकता है। यदि उनकी आवश्यकता है, तो वे संतुष्ट हो जाते हैं और फल स्वरूप, उनका व्यक्तिगत विकास भी स्वभाविक ढंग से होता है।

शिक्षा – मनोविज्ञान, अध्यापक को बालकों की आवश्यकता से अवगत कराता है।  

स्किनर (skinner) के शब्दों में- “ अध्यापक शिक्षा – मनोविज्ञान, से प्रत्येक छात्र की अनोखी आवश्यकताओं के बारे में बहुत- कुछ सीख सकते हैं।


7. बालक (विद्यार्थी) की व्यक्तिगत विभिन्नताओ का ज्ञान knowledge of individual different - 


मनोविज्ञान की खोजों और शोधों ने सिद्ध कर दिया है कि हर विद्यार्थी की रुचियों, योग्यताओं, क्षमता आदि में अंतर होता है। शिक्षकों कक्षा में ऐसे ही बालकों को शिक्षा देनी पड़ती है। वह अपने इस कार्य में तभी सफल हो सकता है, जब वह मनोविज्ञान का अध्ययन करके उनकी व्यक्तिगत  विविधताओं से पूर्ण रूपेण परिचित हो जाए और विद्यार्थी की भावनाओ को समझ सके तभी वो एक योग्य शिक्षक बन सकता है और अच्छे से अध्यन करा सकता है ।


8.बालकों (विद्यार्थियों) की मूल प्रवृत्तियों का ज्ञान Knowledge Of Children’s Instinct-


मैकडूगल के अनुसार मूल- प्रवृत्तियां संपूर्ण मानव व्यवहार के शिक्षा है । शिक्षा – मनोविज्ञान, अध्यापक को बताता है कि मूल – प्रवृत्तियां विभिन्न आयु के बालकों में किस प्रकार के व्यवहार का कारण होती है। यह ज्ञान, पिक्चर के लिए बहुत लाभदायक होता है, क्योंकि शिक्षक, बालकों के व्यवहार के कारणों को समझकर उस में वांछित परिवर्तन कर सकता है। इस प्रकार व उनका, समाज का, विद्यालय का सभी का हित कर सकता है।


9.बालकों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करनें में सहायक All -Round  Development Of Personality Of The Child – 


शिक्षा देने और पाने का एक मुख्य उद्देश्य – बालकों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति में शिक्षा – मनोविज्ञान, अतिशय योग देता है। यह शिक्षक को उन विधियों की जानकारी प्रदान करता है जिनका प्रयोग करने से बालकों के  व्यक्तित्व का चतुर्मुखी विकास किया जा सकता है।


10. मूल्यांकन की नई विधियो का प्रयोग 

Use Of New Methods Of Education :- 


मूल्यांकन, छात्र और अध्यापक, दोनों के लिए आवश्यक है। छात्र यह जानना चाहता है कि उसने कितना ज्ञान प्राप्त किया है। शिक्षक जानना चाहता है कि वह अपने छात्र को शिक्षा प्रदान करने में किस सीमा तक सफल हुआ है। शिक्षा – मनोविज्ञान मूल्यांकन की ऐसी अनेक विधियां बताता है, जिनका प्रयोग करने से छात्र अपनी प्रगति का और शिक्षक, छात्र की प्रगति का अनुमान लगा सकता है। शिक्षक को होने वाले एक अन्य लाभ के बारे में 

स्किनर( shkinner) ने लिखा है- शिक्षा – मनोविज्ञान का ज्ञान, शिक्षक को शिक्षक के रूप में अपनी स्वयं की कुशलता का मूल्यांकन करने में सहायता देता है।


एलोन मस्क 


10.कक्षा की समस्याओं का समाधान Solving Of Them Problems Of Class – Room –


विद्यालय में  कक्षा – कक्ष की मुख्य समस्याएं हैं – अनुशासनहीनता , बाल – अपराध, समस्या बालक छात्रों का पिछड़ापन आदि। शिक्षा – मनोविज्ञान, शिक्षक को इन समस्याओं के  कारणो को खोजने और उनको दूर करने में सहायता देता है।आज स्थिति यह है कि कक्षा गत शिक्षण एवं व्यवहार, दोनों का अध्ययन शिक्षा – मनोविज्ञान द्वारा होता है। 

प्रोफेसर सुरेश भटनागर के अनुसार – “ शिक्षा – मनोविज्ञान शिक्षा की कक्षागत समस्याओं के मूल  कारण समझने तथा समस्या समाधान के अवसर प्रदान करता है"।

Educational psychology provides The opportunities to the teacher to understand and solve the class -room problems. “--- prof.  Suresh Bhatnagar.



उपसंहार ( Conclusion) :-

मनोविज्ञान का ज्ञान ही शिक्षक की सफलता का रहस्य है। इस ज्ञान का आश्रय लिए बिना उसे अकुशलता और असफलता के बीच में गुजर कर अपने व्यवसायिक जीवन की यात्रा समाप्त करनी पड़ती है। हमारा अकाट्य तर्क यह है कि मनोविज्ञान उसे अपने कर्तव्यों और दायित्वों का पालन करने में हर घड़ी सहायता और मार्ग  -प्रदर्शन करता है। अतः हर शिक्षक को इसका प्रयोग कर अपने आप को विद्यार्थियों के अनुकूल बनाना चाहिए ।


FAQ कुछ महत्व पूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर  


Q1- शिक्षक के लिए शिक्षा मनोविज्ञान की क्या उपयोगिता है ?


Ans- शिक्षा मनोविज्ञान की सहायता से (शिक्षक) अध्यापक अपने अंदर  स्वभाव, बुद्धि स्तर, व्यवहार, योग्यता आदि का ज्ञान प्राप्त करता है। यह ज्ञान उसे शिक्षण कार्य को सफल बनाने में सहायता प्रदान करता है, और इस प्रकार उसकी व्यावसायिक तैयारी में अत्यधिक योग देता है।इस प्रकार शिक्षक के लिए शिक्षा मनोविज्ञान अनेक प्रकार से उपयोगी है।


Q2- मनोविज्ञान की क्या उपयोगिता क्या है?


Ans- मनोविज्ञान का ज्ञान व्यक्ति को सारी चीजों को समझने में मदद करता है इसकी सहायता से व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की भावनाओ , चिंताओं स्थिति को समझ सकता है यह इसके द्वारा आप खुद को और दूसरो को मानसिक बीमार होने से बचा सकते हैं।


Q3- शिक्षा मनोविज्ञान कैसे शिक्षक के लिए उपयोगी है ?


Ans- शिक्षक का कार्य सिर्फ विद्यार्थी को पढ़ाना नही होता है उसे उसका सम्पूर्ण विकास और अपनी बात या विषय उसको समझना भी होता है शिक्षा मनोविज्ञान की सहायता से शिक्षक विद्यार्थी के स्वभाव गुण आदि को जानकर उसको सही शिक्षा और मूल्यांकन करना सिखाता है ।


Q4- शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र क्या है ?


Ans- शिक्षा मनोविज्ञान  मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत शिक्षक शिक्षण की प्रभावशाली तकनीक को विकसित करना कमियों को सुधारना और विद्यार्थियों को सही दिशा और शिक्षा प्रदान करने में मदद करना सिखाती है ।


Q5- शिक्षा मनोविज्ञान का जनक कौन है ?


Ans- एडवर्ड थार्नडाइक को शिक्षा मनोविज्ञान का जनक कहा जाता है।


Q6- शिक्षा मनोविज्ञान के कार्य क्या है? और उपयोगिता क्या है?

 

Ans- शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षको को सीखने के नियम ,विधियों और सिद्धांतो का ज्ञान प्रदान करती है इसकी सहायता से शिक्षक अपने आप को और फिर विद्यार्थियों को आने वाली कठिनाइयों से भली भांति परिचित करा पाते है ।


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